Monday, March 8, 2010

आँखें

जाने क्या कुछ कहा जाती हैं ये आँखे
ये तेरी आँखें ये मेरी आँखें
कभी कभी तो नज़ाकत भरी होती है ये आँखें
कभी थोड़ी सी शरारत भरी होती है ये आँखें
इन आँखों में थोड़ी सी हया भी तो होती है
आँखों से मोहोब्बत बयाँ भी तो होती है
खूबसूरत सी तसवीर हैं ये जो आँखे
एक प्यार की तबदीर हैं ये जो आँखें
आँखों में मासूमियत भी तो नज़र आती है
नज़र उठती है तो कभी शरमाती है
अलग अंदाज बयाँ करती हैं ये आँखें
देखकर तुमको कभी घबराती है जो ये आँखें
तेरी आँखों में नज़र आती है मेरी आँखें

नंद के लाल ओ घनश्याम

नंद के लाल ओ घनश्याम
आ सुनदे बाँसुरी हमै
कब से मन तरस रहा देखने को तुम्हे
नंद के लाल ओ घनश्याम
आओ जमुना के तीर चलें
संग संग है राधा रानी गोपियों को भी कहकर चलें
नंद के लाल ओ घनश्याम
नटखट है तू श्याम सलोना
चंचल है रूप मनोहारी
माने ना किसी का भी कहना
नंद के लाल ओ घनश्याम
माखन भी है पास मेरे
कब से रास्ता देख रही कब आओगे मेरे द्वारे

कान्हा श्याम सलोने कान्हा

कान्हा ओ श्याम सलोने कान्हा
मेरे द्वारे कब आओगे
फिर से बांशुरी की मधुर मधुर सी धुन
हमको कब सूनाओगे ओ कान्हा
वृंदावन में फिर से तुम गोपियों संग
होली खेलन को कब आओगे
राधाजी को संग लिए मेरे द्वारे कब तुम आओगे
कान्हा ओ श्याम सलोने कान्हा
कब तुम वो नटखट सा मनोहारी रूप दिखाओगे
फिर से यमुना जी के तट पर गेंद खेलन को कब आओगे
कान्हा ओ श्याम सलोने कान्हा
कब तुम गांव की ग्वालन के माखन झूम झूम कर खाओगे
वृंदावन में फिर से तुम कब दरश हमें दिखाओगे
कान्हा ओ श्याम सलोने कान्हा

Sunday, March 7, 2010

राम राम बस राम

करो स्मरण ऐ दुखी मन
बस राम राम बस राम
निराश ना हो यूँ बैठे बैठे
दुखड़ा क्यों तू रोए है
नाम प्रभु का तु जप ले हर पल
ऊँचे सपनों में क्यों तु खोए है
ईश्वर भी तो एक है
चाहे रहीम हो चाहे राम
मन के सारे मैल धुलेंगे
जीवन का एक पल तो दो प्रभु के नाम
मोह माया में जकड़ा हुवा है
भोगों में क्यों घुला हुआ है
शरण आओ तुम पहले प्रभु के
धुल जाएँगे सारे पाप
मोह माया ना ज़कड सकेगी
पा लोगे तुम पार की हर पल जप लो
प्रभु का नाम बस राम राम बस राम

यादें

जो है प्यारा हमें अपनी जाँ की तरह
वही पेश आता है अब तो ना मेहरबाँ की तरह
रोने की आदत न थी हमको
पर वो क्यों रुला रहे
ऐसे क्यों वो हो गये हैं
जो खुद बेवफा कहला रहे
ये दर्द छुपा हुवा था दिल में जिस तरह
इसे बताया भी तो कैसे जाए
जो था दिल के करीब इस तरह
उसे ही भुलाया भी तो कैसे जाए
अब तो तन्हा रहकर भी महफ़िल में भटकते हैं
की महफ़िल में रहकर भी तनहा से रहते हैं
रह रहकर ये दर्द आँखों में उभरता है जिस तरह
बस यादें लेकर जिसकी अब जी रहें हैं हर तरह

गुरु कृपा

गुरु कृपा जब हो जाती है
सारी बाधाएँ खो जाती है
संकट सारे टल जाते हैं
जब गुरु कृपा मिल जाती है
हर वक्त उन्हीं का ध्यान करें
गुरु नाम का ही जप करें
अच्छे कार्य करते जाएँ
बस उन्हीं का तप करें
गुरु ध्यान से ही तो शिव कृपा मील जाती है
गुरुब्रम्ह गुरुविश्नु गुरुमहादेव कहलाते हैं
शाम सुबह हर वक्त हमें अपने गुरुदेव याद आते हैं
सारी ख़ुशियाँ मील जाती है की
जब गुरु कृपा हो जाती है

Saturday, March 6, 2010

ये मेरा मन

क्यों ये मन पंछी की तरह
हवा में उड़ने को मचलता है
क्यों जाते हुए बादलों के संग
साथ हो जाने को मन करता है
क्यों ये मन सागर की लहरों में
भीग जाने को मचलता है
क्यों बारिश की बूँदों मै
जो भीग जाने को मन करता है
मन तो चंचल है हर वक्त बदलता रहता है
जो ये मौसम है वैसा ही तो होता है
मन का क्या है कब किस में खो जाता है
और कब किसका हो जाता है
बाँवरा मन है ये मेरा मन है